मैं रीता हूँ मेरे पति का नाम अतुल है। मेरे पति चाहते हैं कि मैं उनका लौड़ा चुसूं
और पूरी नंगी होकर सेक्स में तरह तरह के खेल करूँ। इस बात को लेकर अक्सर मेरी उनसे
लड़ाई हो जाती थी। मुझे लौड़ा चूसने से बड़ी चिढ़ थी मुझे लौड़ा चूसना बहुत गन्दा काम
लगता था।
एक बार लड़ाई तेज हो गई, अतुल बोले- कुतिया, तू लौड़ा नहीं चूस सकती तो यहाँ से भाग
जा !
मैं भी लड़ कर अपने घर आ गई। मैंने अपनी माँ को बता दिया कि अब मैं घर नहीं जाऊंगी।
मेरी माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा। मेरे भैया 3-4 दिन के लिए घर से बाहर थे इसलिए रात
में मैं भाभी के कमरे में सोने चली गई।
मैं और भाभी रात को दस बजे बिस्तर पर आ गई। भाभी ने साड़ी उतार दी। वो अब पेटीकोट और
ब्लाउज़ में थीं। उन्होंने पेटीकोट उठा कर अपनी चड्डी भी उतार दी। ब्रा वो पहने नहीं
थीं। मैं एक मैक्सी और चड्डी पहने थी।
भाभी ने मुझसे पूछा- ब्लू फिल्म देखोगी क्या?
मैं पिछले दस दिन से नहीं चुदी थी, मेरी चूत में खुजली हो रही थी।
मैं बोली- देख लूंगी !
भाभी ने एक सेक्सी हिंदी ब्लू फिल्म लगा दी। फिल्म में कुछ देर बाद लड़कियों ने
लड़कों के लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिए।
मैं बोली- भाभी यह काम तो केवल रंडियां ही कर सकती हैं !
भाभी मुस्करा कर बोली- शुरू शुरू में तो गन्दा लगता है लेकिन एक बार चूस लो तो फिर
बार बार लंड चूसने का मन करता है ! तेरे भैया तो दिन में एक बार लंड चुसवाते ही
हैं।
मैं बोली- ऊहं ! मैं तो कभी नहीं चूस सकती !
कुछ देर बाद लड़की की चूत में लौड़ा घुसा कर लड़के चोदने लगे। कमरे में फिल्म की
सेक्सी आवाज़ गूँज रही थी। भाभी पेटीकोट उठा कर अपनी चूत सहलाने लगीं। मेरा हाथ बार
बार मेरी चूत पर जा रहा था लेकिन मैं हटा लेती थी।
भाभी मुस्करा कर मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- शरमा क्यों रही है ? खुजली हो रही है तो
खुजा ले ! ला, मैं तेरी खुजा देती हूँ और तू मेरी खुजा दे !
भाभी ने मेरी मैक्सी खोल कर मेरी चड्डी में ऊँगली डाल दी और मेरी चूत खुजानी शुरू
कर दी। मेरा हाथ उन्होंने अपनी चूत पर रख दिया। मैं भी उनकी चूत खुजलाने लगी। ब्लू
फिल्म अपनी चरम सीमा पर थी। अब दो लड़कियों की चूत उन्हें सीधा लेटाकर २ लड़के मार
रहे थे और एक लड़का उनमें से एक लड़की को अपना लंड चुसवा रहा था। उनकी उहं उहं ओह ओह
की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
मैं और भाभी बहुत गरम हो रहे थे, भाभी ने अपना पेटीकोट, ब्लाउज़ उतार दिया था। मैं
भी सेक्स की गर्मी में नहा रही थी और पूरी नंगी हो गई थी। भाभी की चूत पूरी चिकनी
थी। मेरी चूत पर झांटों का जंगल उग रहा था।
भाभी बोली- ननदजी, लगता है रमेश जी को जंगल में घुस कर चोदना अच्छा लगता है !
उन्होंने मेरी चूत में ऊँगली घुसा दी। मैंने भी उनके चूत के होटों को रगड़ना जारी
रखा।
फिल्म ख़त्म हो गई थी। हम दोनों पूरी नंगी एक दूसरे से बुरी तरह से चिपकी हुई थी।
मेरी चूत भाभी की चूत से पूरी छुल रही थी और चूचियां रगड़ खा रही थीं। हम दोनों ने
एक दूसरे के होंठ चूसे और चूचुक उमेठे। थोड़ी देर बाद भाभी और मैंने एक साथ पानी छोड़
दिया उसके बाद हम दोनों सो गए।
अगली रात को हम लोग फिर साथ सोये। आज भाभी मेरे सामने पूरी नंगी हो गई थीं, बोली-
तेरे भैया के साथ तो मैं पूरी नंगी ही सोती हूँ ! अब कल तो हम लोगों ने मौज की ही
थी, आज और मौज करते हैं!
और उन्होंने मुझे भी पूरा नंगा करा दिया। मेरी झांटों के जंगल पर हाथ फिरा कर भाभी
बोलीं- चल, इसे साफ कर ले ! फिर मज़ा चखाती हूँ !
और उन्होंने क्रीम लगाकर मेरी चूत पूरी चिकनी कर दी। भाभी बोलीं- आज मैं तुझे असली
लंड जैसा मजा देती हूँ !
भाभी अपनी अलमारी की तरफ गईं, उन्होंने एक नकली लंड अपनी अलमारी से निकाला और बोली-
यह नकली लंड है ! बिल्कुल असली जैसा मज़ा देता है ! तेरे भैया ने अमेरिका से लाकर
दिया है। इसे चूत में फिट करके लड़कों की तरह औरतों को चोदा जा सकता है और अपने हाथ
से भी चूत में डाल कर मजा ले सकते हैं। अब बता मैं तुझे चोदूँ या तू मुझे चोदेगी?
मैं बुरी तरह शरमा रही थी, भाभी बोली- बहुत शर्माती है? चल लेट ! पहले मैं ही तुझे
चोदती हूँ !
और उन्होंने अपनी चूत में लंड फिक्स कर लिया। भाभी नकली लंड लगा कर ऐसी लग रहीं थीं
जैसे कोई गोरे लंड वाला चिकना लौंडा मुझे चोदने को खड़ा है। मुझे गिरा कर भाभी मेरे
ऊपर लेट गईं और मेरी चूत में अपना नकली लौड़ा हाथ से पकड़ कर घुसा दिया। नकली लंड
मेरे पति से मोटा था, मेरे मुँह से ऊहऽऽ मर गई ! मर गई ! की आवाज़ निकल गई, लेकिन
मुझे साथ ही साथ मज़ा भी आया था।
भाभी ने मेरी चूचियाँ मलते हुए करीब दस मिनट तक नकली लंड से मुझे चोदा। उसके बाद
उन्होंने मेरी चूत में लंड फिक्स कर दिया और बोली- चल अब तू मुझे चोद !
मैं चोदने में शरमा रही थी, भाभी बोली- साली शरमाती बहुत है !
और वो मेरे ऊपर उछ्ल कर बैठ गईं और ऊपर उछ्ल उछ्ल कर चुदने लगीं। उन्होंने मेरे हाथ
अपने बड़े बड़े संतरों पर रख लिए और बोलीं- कुतिया, इन्हें तो दबा दे !
मुझे उनके मोटे मोटे चूचे मसलने में बड़ा मज़ा आने लगा। थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गई।
उसके बाद हम दोनों पहले की तरह चिपक कर सो गई।
रात के 3-4 बजे घर में घंटी बजी, भैया बाहर से आ गए थे। मैं भी जाग गई। भाभी, मैं
और भैया बातें करने लगे। थोड़ी देर में मैं सोने लगी। तभी मुझे ऐसा लगा जैसे भाभी
उठकर बाथरूम में गई हों। कुछ देर बाद मैंने बाथरूम में झाँककर देखा तो मैं दंग रह
गई- भाभी भैया का लंड पैंट से निकाल कर लपालप चूसे जा रही थीं। उसके बाद इंग्लिश
टॉयलेट पर बैठकर भैया ने अपने लौड़े पर भाभी को बिठा लिया और कस कस कर उनकी चूचियों
को मसलने लगे। भाभी धीरे धीरे चिल्ला रही थी- कुत्ते ! चूत में डाल इस लौड़े को ! 15
दिन से बिना चुदे पड़ी हूँ ! कोई और होती तो रंडी बन गई होती ! भैया ने एक झटके में
लंड भाभी की चूत में घुसा दिया और भाभी चिल्ला उठीं- उईऽऽ ! मर गई ! फट गई ! मज़ा आ
गया ! क्या घुसाया है !
भैया भाभी की घुन्डियाँ मसलते हुए बोले- रंडी, नकली लंड नहीं डाला अपनी चूत में ?
तुझे अमेरिका से लाकर दिया था !
लौड़े पर उछ्लती हुई भाभी बोली- अरे कुत्ते ! तेरे जैसे लंड का मज़ा नकली में कहाँ !
साले को जब तक नहीं चखा था तब तक तो कोई बात नहीं लेकिन अब तो तीन दिन नहीं चुदुं
तो मन करने लगता है कि सब्जी वाले को बुलाकर चुदवा लूँ ! मेरे कुत्ते, ज्यादा दिन
को मत जाया कर ! अगर रंडी बन गई तो तू जिम्मेदार होगा..
भाभी उनके लौड़े पर धीरे धीरे उछ्ल रहीं थीं, भैया उनकी चूचियों की घुन्डियाँ मसल
रहे थे। भैया बोले- चल जरा हट थोड़ा ! तेरे को पीछे से ठोकता हूँ !
भैया ने भाभी को उठा दिया। भैया उठते, इससे पहले ही भाभी ने उन्हें रोका और बोलीं-
तेरा शेर बहुत सुंदर लग रहा है ! इसको थोड़ा चूस लूं !
यह कह कर उन्होंने भैया का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और तेजी से आगे पीछे करके
चूसने लगी। मैं हैरान थी कि मेरी भाभी इतना मस्त होकर लौड़ा चूसती हैं। भाभी इस समय
ब्लू फिल्म की हिरोइन लग रही थीं। भैया का सुपाड़ा ऐसे चाट रही थीं जैसे कोई
आइसक्रीम चाट रहा हो। भैया भाभी की गांड में ऊँगली कर रहे थे।
भैया बोले- चल कुतिया लौड़ा छोड़ और अब जरा चूत बजाने दे।
भाभी टॉयलेट की सीट पर हाथ रखकर घोड़ी बन गईं। भैया ने पीछे से उनकी चूत में लंड
छुला दिया और धीरे धीरे से उनके संतरे मसलते हुऐ लंड उनकी चूत में घुसा दिया और
भाभी को चोदने लगे। भाभी की ऊहं ऊह की आवाजें साफ़ सुनाई दे रही थीं। भैया बीच बीच
में जोर से हाथ उनके चूतड़ों पर मार देते थे। कुछ देर बाद भैया ने अपना लंड बाहर
निकाल लिया। लंड झड़ चुका था। भाभी खड़ी होकर भैया से चिपक गईं और उन्हें चूमती हुई
बोलीं- सच, आज बहुत मजा आया !
इसके बाद मैं बिस्तर पर आकर लेट गई थोड़ी देर में भाभी भी मेरे पास आकर सो गईं। मैं
सोच रही थी कि भाभी तो बहुत बदमाश हैं, लंड लपालप ऐसे चूसती हैं जैसे आइसक्रीम खा
रही हों ! छीः छीः कितना गन्दा काम है लंड चूसना ! चुदने में तो मजा आता है लेकिन
लंड चूसना ? छीः छीः. मैं तो कभी नहीं चूस सकती..
अगले दिन से मैं अलग कमरे में सोने लगी। भाभी अब भैया के साथ सो रही थीं। मुझे घर
में रहते हुए बीस दिन से ज्यादा हो गए थे। भाभी अब मुझसे थोड़ा चिढ़ने लगी थीं।
एक दिन मैं बाज़ार घूमने गई। मुझे बाज़ार में मेरी पुरानी सहेली उमा मिल गई, वो मुझसे
बोली कि उसके पति बाहर गए हुए हैं और मुझे अपने साथ रहने को कहा।
उमा मेरी अच्छी दोस्त थी। मेरी दोस्त होने के कारण उसकी भाभी से भी दोस्ती थी लेकिन
वो बदमाश टाइप लड़की थी और पैसे के लिए बहुत लालची थी, शादी से पहले वो मेरे साथ
हॉस्टल में रहती थी तो उसकी एक कॉल गर्ल के दलाल से दोस्ती थी और महीने में एक दो
बार उमा पंच-तारा होटल में चुदने जाती थी। मुझे वो बताती थी कि उसके एक रात के दस
हज़ार लगते हैं जिसमें से पाँच उसको मिल जाते थे और ग्राहक टिप अलग से देता था। मुझे
भी उसने चुदने के लिए कई बार कहा, लेकिन मैं कभी चुदने नहीं गई। बाद में उमा की
शादी एक कम्पनी के मैंनेजर से हो गई।
मुझे घर में रहते हुए 20-22 दिन हो गए थे, भाभी मुझसे चिढ़ने सी लगी थीं। मैंने सोचा
की दो दिन बाद मैं उमा के पास जाकर रह लूंगी। मेरी मौसी दो दिन के लिए आ रही थीं।
मैंने उमा से कहा- मैं दो दिन बाद तेरे साथ आकर रहूंगी।
अगले दिन मेरी मौसी आ गईं पूरा दिन गपशप में चला गया। रात में मुझे भाभी के कमरे
में सोना पड़ा। मैं भाभी के कमरे में भाभी के साथ सोई। आदमी लोग अलग कमरे में सोये।
मौसी और माँ एक अलग कमरे में सोई थीं। अगले दिन भैया को सुबह टूर पर जाना था, भाभी
भन्ना सी रही थीं क्योंकि आज उन्हें बिना चुदे सोना था। मुझसे एक दो बार बोली भी
थीं कि तू बिना चुदे कैसे रह लेती है? मेरी तो चूत एक दिन न चुदे तो खुजियाने लगती
है। रात बारह बजे भाभी मुझसे बोली- प्यारी ननद जी, आप एक घंटा छत पर टहल आओ, तब तक
मैं इनसे से चुदवा लेती हूँ ! फिर तो यह 5 दिन बाद वापस आयेंगे।
मुझे पहले से ही नींद नहीं आ रही थी, मैं बाहर छत पर टहलने चली गई। मौका देखकर भाभी
ने भैया को अंदर बुला लिया और अपनी चूत की सेवा करवाने लगीं।
थोड़ी देर बाद मैंने सीढ़ियों के पास मौसी और मौसा को कुछ फुसफुसाते देखा। मैं चुप हो
कर बातें सुनने लगी। मौसी मौसा का लंड पैंट से निकाल कर पकड़े हुए थीं और कह रही थीं-
कुत्ते, तेरा घोड़ा तो बड़ा टनटना रहा है लेकिन चूत में घुसते ही पिचक जाता है। एक
जमाना था कि एक एक घंटे तक मेरी सुरंग में हल्ला मचाता रहता था।
मौसी की दोनों चूचियां खुली हुई थीं और पपीते की तरह लटक रही थीं। मौसा मौसी की
चूचियां मसल रहे थे, मौसी के चूचुक पर चुटकी काटते हुऐ मौसा बोले- कुतिया, बहुत
गाली दे रही है ? तेरी जवानी की आग भी तो बहुत बुझाई है इसने !
मौसी लंड को मसलते हुए बोलीं- अरे गाली क्यों दूँगी मेरे कुत्ते ! तेरे शेर को तो
मैं अब भी सबसे जयादा प्यार करती हूँ ! इधर ला जरा एक पप्पी तो लेने दे इसकी !
इतना कह कर मौसी ने मौसा का लौड़ा मुँह में रख लिया और पूरी मस्त होकर चूसने लगी।
मैं हैरान थी कि पचास साल की मौसी भी लौड़ा चूस सकती हैं। मौसी मौसा की गोदी में सर
रखकर मस्ती से 5 मिनट तक लौड़ा चूसती रहीं, 55 साल के मौसा ने 5 मिनट बाद रस छोड़
दिया, मौसी उसे अपने मुँह में गटक गई।
मौसा बोले- चल भाग चलें ! किसी बच्चे ने देख लिया तो क्या सोचेगा !
मैं 2-3 मिनट खड़ी यह सोचती रही कि पता नहीं लोग लौड़ा कैसे चूस लेते हैं ?
अगले दिन मौसी ने मुझे अकेले में पकड़ लिया और बोली- क्यों? रात को छिप कर क्या देख
रही थी? इतनी चूत में आग लग रही है तो आदमी से दूर क्यों रह रही है? घर जा और चुदवा
! यह गन्दी बात होती है किसी को छिप कर देखना !
भाभी मुझसे चिढ़ी-चिढ़ी सी रह ही रही थीं, ऊपर से मौसी की बात से मेरा दिमाग ख़राब सा
हो रहा था। इन सबके बाद एक असली बात यह भी थी कि मेरी चूत में खुजली भी जोरों की हो
रही थी क्योंकि मेरे पति चूत तो मेरी रोज़ ही चोदा करते थे और अब भाभी मौसी की
चुदाई होते देखकर मेरी चूत रोज़ पानी छोड़ रही थी। मैंने सोचा कुछ दिन उमा के पास
जाकर रह आती हूँ।
उमा एक मस्त स्वभाव की लड़की थी कॉलेज के दिनों में उसने काल गर्ल बनकर, बॉय फ्रेंड
बनाकर कई बार कई लोगों से अपनी चूत को चुदवाया था। मेरी रूम मेट रही थी, कई बार
गर्मी में हम दोनों नंगी होकर सोती थीं इसलिए मुझमें और उसमे शर्म की कोई बात नहीं
थी। मेरी उससे अच्छी दोस्ती थी। रात को नौ बजे मैं उमा के घर पहुँच गई। मुझे देखकर
उमा खुश हो गई। हम दोनों ने खाना खाया, इसके बाद उमा मेरी साड़ी उतार कर बोली- चल,
आज नंगे सोते हैं ! तेरी सुहागरात और चुदाई की कहानी भी तो मुझे सुननी है !
चूंकि पहले भी हम नंगी होकर सो चुकी थीं इसलिए रात को हम दोनों नंगी होकर सो गईं।
उमा बोली- अब तो तेरी शर्म छुट गई होगी ! तीन महीने हो गए तेरी शादी को ! अब तक तो
सौ से ज्यादा बार चुद चुकी होगी? बोल, चुदने में मज़ा आता है या नहीं?
और वो मेरा चूत के होटों से खेलने लगी। मैंने कभी खुल कर अतुल से चूत नहीं चुदवाई
थी लेकिन रोज़ रात को अतुल जबरदस्ती मेरी चूत चोद देते थे। अब 20-25 दिन से मैं
बाहर थी तो मुझे चूत की खुजली पता चल रही थी। मैं भी उमा की चूत खुजाने लगी। थोड़ी
देर में हम दोनों गर्म थीं, उमा बोली- खुजली ज्यादा हो रही हो तो बोल ! धंधे पर
चलते हैं ! नोट भी कमाएंगे और मौज भी लेंगे !
मैं बोली- नहीं बाबा ! नहीं ! मुझे तो बड़ा डर लगता है ! तू क्या शादी के बाद भी
धंधा करती है?
उमा बोली- भाई कभी कभी अब भी लगवा लेती हूँ ! पटी जब बाहर होते हैं ! एक रात के
पाँच हज़ार मिल जाते हैं और मज़ा भी आ जाता है। लेकिन सिर्फ अपने पुराने यारों से
लगवाती हूँ नहीं तो बदनाम हो जाऊंगी। मैं तो साली बदनाम हो गई थी इसलिए तो 5000
रुपए कमाने वाले से शादी हुई नहीं तो तेरी तरह सॉफ्टवेयर इंजिनियर से शादी होती !
चल यह छोड़, यह बता कितना मोटा लंड है तेरे पति का? अभी नई नई शादी हुई है, 3-4 बार
तो चूस ही लेती होगी एक दिन में ?
मैं हूँ हाँ करती रही ! मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सब लौड़ा चूसने की बातें
क्यों करती हैं !
12 बजे के करीब मैं सो गई। रात को 3 बजे के करीब उमा का मोबाइल बजा। उमा ने तुंरत
काट दिया। मैं नींद में थी इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन दस मिनट बाद उमा उठ
कर गाउन पहन कर गई तो मैं चौंक गई। दबे पाँव मैंने पीछे जाकर देखा तो मैं हैरान थी।
उमा ने अपने फ्लैट का दरवाज़ा खोला, एक जवान सा लड़का अंदर आया, उमा उसे दूसरे कमरे
में ले गई और बोली- राजीव जी, पहले फीस निकालिए !
राजीव ने सौ के नोटों की गद्दी उमा के हाथ में रख दी। उमा मुस्करा दी, गद्दी अलमारी
में रख दी और राजीव की पैंट की चैन खोल दी। उसके बाद उसका लौड़ा निकाल कर चूसने
लगी। राजीव ने अपनी पैंट उतार दी। राजीव का लौड़ा सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा
होगा। पूरा लौड़ा लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था और उमा लौड़ा लप लप कर के चूस रही
थी।
मैं छुप कर देखने लगी। कुछ देर में दोनों नंगे थे। राजीव उमा को पलंग पर लिटा कर
उसकी चूत चूसे जा रहा था, उमा की आह ऊह ओह की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। मेरी
चूत में जोरों की खुजली हो रही थी। होती भी क्यों नहीं ! आज मुझे चुदे हुए पूरा एक
महीना हो गया था।
उमा थोड़ी देर बाद चूत फ़ैला कर लेट गई। राजीव ने उसकी चूत में अपना सात इंच लम्बा
लंड ठोंक दिया और धक्के मरना शुरू कर दिया। उमा की चुदाई शुरू हो गई थी। उमा जोर
जोर से चिल्ला रही थी- उई ! बड़ा मजा आ रहा है ! और जोर से पेल कुत्ते ! क्या चोदता
है ! क्या मस्त लंड है ! महीने में एक बार तो आ जाया कर ! अगली बार से 10% छूट
दूँगी साले ! हरामी क्या मस्त बजाता है ! और जोर से पेल कुत्ते !
राजीव ने 15 मिनट तक उमा की चूत बजाई। उसके बाद उसका लंड खाली हो गया और उसने लंड
बाहर खींच लिया। उमा की चूत की प्यास शांत नहीं हुई थी, उसने राजीव को जबरदस्ती
अपनी तरफ खींच कर एक बार दुबारा उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी। मैं
तो हैरान थी कि भाभी, मौसी उमा सब लंड चूसने में होशियार हैं और मैं लण्ड चूसने को
लेकर लड़ कर आ गई। मेरे मन में एक बार लण्ड चूसने का ख्याल आया लेकिन अपने अहं के
कारण मैं लंड नहीं चूसना चाहती थी और अतुल के पास वापस नहीं जाना चाहती थी।
मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ देर
और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।
सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे उमा
बोली- चुदना हो तो बता दियो ! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है !
मैंने अनजान बन कर पूछा- उमा, शादी के बाद भी औरों से चुदवाती है क्या ?
मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ देर
और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।
सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे उमा
बोली- चुदना हो तो बता दियो ! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है !
मैंने अनजान बन कर पूछा- उमा, शादी के बाद भी औरों से चुदवाती है क्या ?
उमा मुस्करा कर बोली- कुतिया, जो एक से ज्यादा लंडों का मज़ा ले ले, वो फिर लंड की
भूखी हो जाती है ! मेरी जान नए नए लंडों से चुदने में जो मज़ा आता है वो एक मर्द के
लंड में कहाँ है ! मुझे गांड मरवाने में भी मज़ा आता है लेकिन मेरे पति गांड कभी
नहीं मारते ! अपने यारों से मरवानी पड़ती है, ऊपर से कमाई और हो जाती है। चुदना कम
कर दिया है लेकिन महीने में दो तीन का डलवा ही लेती हूँ, जब यह टूर पर होते हैं तो
एक महीने में 10-10 12-12 से भी चुदवा लेती हूँ।
उमा बोली- तू सो रही थी तो एक कुत्ते से तो कल ही चुदवाया है ! परसों खुजली ज्यादा
हो रही थी और किसी से सेटिंग नहीं हो पाई तो दूध वाले को बुलाकर लाई और उससे
चुदवाया था ! असली मज़ा तो चूत के अंदर है ! मेरी रानी चुदवाओ और मस्ती करो ! यही
जिन्दगी है ! जिसने लंड का मज़ा लेना सीख लिया उसे किसी और मज़े में मज़ा नहीं आता है
!
मैं धीरे से बोली- अगर किसी को पता चल गया तो ?
मेरी चूची दबाते हुए उमा बोली- एक गुप्त बात बताऊँ ! तेरी भाभी को 10-12 बार चुदवा
चुकी हूँ। दो साल पहले पहली बार चुदवाया था। अब तो महीने में कम से कम एक बार तो
तेरी भाभी भी बाहर के लंड से चुदती हैं और उनकी चूत के लिए लंड की जुगाड़ तो मैं ही
करती हूँ। तू भी एक बार चुदवा तो ! किसी को पता भी नहीं चलेगा और मज़ा भी बहुत आएगा
! और जिन जिन औरतों को मैंने चुदवाया है, उनके पति भी बहुत खुश रहते हैं क्योंकि वो
जान जाती हैं कि चुदवाया कैसे जाता है।
मेरे मुँह से निकल गया- ठीक है ! लेकिन किसी को पता नहीं चले !
उमा बोली- यह मेरा वादा है ! चल फिर तैयार हो जा ! आज रात के लिए तुझे काल गर्ल
बनाती हूँ ! मैं और तू दोनों साथ धंधा करेंगे !
उमा ने 3-4 जगह फ़ोन मिलाये और फिर मुस्कराती हुई बोली- दो कुत्ते आ रहें हैं ! एक
तो बड़ी राजनैतिक पार्टी का युवा अध्यक्ष है, दूसरा शहर का एक बड़ा ठेकेदार है !
ठेकेदार से मैं और तेरी भाभी दोनों दो-दो बार चुद चुकी हैं ! साले का आठ इंच लम्बा
लंड है। आज तुझे चुसवाती हूँ !
मैं झेंपते हुए बोली- नहीं, लंड नहीं चूसूंगी ! बस चूत में डलवा लूंगी !
उमा मेरी घुंडियों पर चुटकी काटते हुए बोली- वो तू उन पर छोड़ दे
!
मैं कुछ रोमांचित महसूस कर रही थी, रात की चुदाई के बारे में और सोच सोच कर और मेरी
चूत गीली होने लगी थी।
शाम के छः बजे उमा ने ब्लू फिल्म चला दी। नई-नई गोरी-गोरी दो भारतीय लड़कियों की
चूत फिल्म में तीन अंग्रेज़ चोद रहे थे। सब के लंड 8-9 इंच से कम नहीं थे। चुदने के
मस्त मस्त सीन थे, उमा बीयर का ग्लास ले आई और बोली- इसे पी, पीने के बाद चुदवाने
में बहुत मज़ा आएगा।
थोड़ी न नुकर के बाद एक ग्लास बीयर का मैंने पी लिया। अब मैं पूरी गर्म हो रही थी,
मेरी चूत खुजिया रही थी चुदवाने के लिए। उमा मुझे ग्राहकों से बात करने के तरीके
बताने लगी। आठ बजे करीब हम दोनों ने पारदर्शी मैक्सी पहन ली। मेरे दोनों संतरे
मैक्सी में से बिलकुल साफ़ दिख रहे थे। बीयर में कामोत्तेजक दवाई मिली हुई थी, इसलिए
मेरी चूत की खुजली काफी बढ़ी हुई थी और मैं चुदने के लिए पगला रही थी।
नौ बजे दरवाज़े की घंटी बजी। राजू और अनिल नाम के दो आदमी जिनकी उम्र पैन्तीस साल के
करीब थी, अंदर आये। उन्होंने अंदर घुसते ही हमारी कमर में हाथ डाल दिया। राजू मेरी
कमर में हाथ डाले हुए था, जिसे थोड़ी देर बाद उसने पीछे से मेरी चूचियों पर रख दिया
और उन्हें दबाने लगा। अनिल उमा को पहले भी दो बार चोद चुका था। उमा की तरफ देखते
हुए बोला- उमा जी, मज़ा आ गया ! क्या खूबसूरत हसीना है तेरी फ्रेंड !
और उसने मेरी चूचियाँ आगे से कस कस कर मसल दीं और बोला- कुतिया, जरा अपना नाम तो
बता दे !
मैं मुस्कराते हुए बोली- आपको जो पसंद हो वो बुला लेना !
राजू बोला- हमें तो तू मालगाड़ी लग रही है ! चल तेरा नाम मालगाड़ी रख देते हैं।
उमा बोली- राजा मालगाड़ी के बदले माल तो निकाल !
अनिल ने एक 500 की गद्दी उमा की तरफ बढ़ा दी और बोला- ले मेरी कुतिया आज तू जितना
सोची होगी उससे ज्यादा लाया हूँ।
नोट की गद्दी उमा ने अलमारी में रख दी और बोली- हजूर ! अब हम लौंडियाऐं तुम्हारी
गुलाम हैं।
हम दोनों को राजू और अनिल ने गोद में उठा लिया और पीछे वाले कमरे में ले आए। राजू
ने अपने होंठ मेरे होटों से चिपका दिए और मेरे होटों का रस चूसने लगा। साथ ही साथ
मेरे संतरों का जूस भी निकल रहा था। उमा को अनिल ने पूरा नंगा कर दिया था और उसके
ऊपर लेटकर उसके होंठ चूसे जा रहा था। उमा उसका लंड पकड़े हुए थी। थोड़ी देर में उमा
ने अनिल को हटा दिया और दो पैग बनाने लगी। मेरी मैक्सी भी जो अब नाममात्र की शरीर
पर रह गई थी, राजू ने उसे भी हटा दिया। अनिल और राजू ने भी अपने कपड़े उतार दिए थे।
जब तक उमा पेग बना रही थी तब तक दोनों साइड में मुझसे चिपक कर मेरे संतरों से खेल
रहे थे और अपनी जांघें मेरी जांघों से सटा कर रगड़ रहे थे। मेरी चूत गरम भट्टी की
तरह दहक रही थी। उमा थोड़ी देर बाद चार पेग बना लाई। हम लोगों ने चीयर्स करी और फिर
हम दोनों को राजू और अनिल ने पलंग पर आधे लेटे हुए अपनी गोद में लौड़े के ऊपर बैठा
लिया। दोनों के लंड मेरी और उमा की चूत से टकरा रहे थे और दोनों हमारे मुँह तिरछा
कर के होंठ चूस रहे थे और चूचियाँ मसल रहे थे।
अनिल बोला- उमा डार्लिंग ! जरा लौड़ा चूसो ! साला तुम्हारे प्यार के लिए तड़प रहा है
!
राजू भी मुझसे लौड़ा चुसवाने के लिए बोला लेकिन मेरा लौड़ा चूसने का मन नहीं कर रहा
था।
उमा बोली- पहली बार गैर आदमी से चुद रही है, इसलिए शरमा रही है !
उमा ने मेरे चूचुकों पर चुटकी काटी और बोली- जरा लौड़ा पकड़ के तो देख ! कितना मस्त
लौड़ा है ! बिलकुल लोहे की रॉड की तरह है ! बहुत मस्त चोदते हैं राजू साहब !
और उमा ने मेरा हाथ उठाकर उसके लंड पर रख दिया किसी तरह चोर नज़रों से मैंने राजू
का लौड़ा मुट्ठी में पकड़ लिया। लौड़ा बिल्कुल कठोर और गर्म हो रहा था। मेरे को नशा हो
रहा था और मेरी चूत बुरी तरह गर्म हो रही थी इसलिए मैं लौड़ा मसलने लगी और राजू से
चिपक गई। उमा का भी यही हाल था। मेरी चूत पूरी गीली हो रही थी और पानी छोड़ रही थी।
थोड़ी देर बाद अनिल और राजू एक साथ उठे और बोले- रानी चलो एक एक राउंड तुम्हारी
चुदाई का हो जाए !
मेरा गोरा गरम बदन और ऊपर से पहली बार दारू के नशे ने मेरी सेक्स मस्ती को बढ़ा दिया
था। राजू का लौड़ा मैं जोर जोर से सहला रही थी, तभी राजू ने मुझे नीचे लेटा दिया और
मेरे संतरे अपने हाथों से मसलते हुए मेरे ऊपर सवार हो गया। उसने मेरी चूत पर एक जोर
का झटका लौड़े से मारा। मेरे मुँह से- ऊई ! मज़ा आ गया ! घुसा साले ! अंदर घुसा ! की
आवाज़ निकल गई। राजू नशे में था, अपने लौड़े को सही जगह फिट नहीं कर पा रहा था।
दूसरी तरफ उमा की चूत में अनिल ने लौड़ा घुसा दिया था। बिल्कुल ब्लू फिल्म की तरह
उमा चुद रही थी।
और पूरी नंगी होकर सेक्स में तरह तरह के खेल करूँ। इस बात को लेकर अक्सर मेरी उनसे
लड़ाई हो जाती थी। मुझे लौड़ा चूसने से बड़ी चिढ़ थी मुझे लौड़ा चूसना बहुत गन्दा काम
लगता था।
एक बार लड़ाई तेज हो गई, अतुल बोले- कुतिया, तू लौड़ा नहीं चूस सकती तो यहाँ से भाग
जा !
मैं भी लड़ कर अपने घर आ गई। मैंने अपनी माँ को बता दिया कि अब मैं घर नहीं जाऊंगी।
मेरी माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा। मेरे भैया 3-4 दिन के लिए घर से बाहर थे इसलिए रात
में मैं भाभी के कमरे में सोने चली गई।
मैं और भाभी रात को दस बजे बिस्तर पर आ गई। भाभी ने साड़ी उतार दी। वो अब पेटीकोट और
ब्लाउज़ में थीं। उन्होंने पेटीकोट उठा कर अपनी चड्डी भी उतार दी। ब्रा वो पहने नहीं
थीं। मैं एक मैक्सी और चड्डी पहने थी।
भाभी ने मुझसे पूछा- ब्लू फिल्म देखोगी क्या?
मैं पिछले दस दिन से नहीं चुदी थी, मेरी चूत में खुजली हो रही थी।
मैं बोली- देख लूंगी !
भाभी ने एक सेक्सी हिंदी ब्लू फिल्म लगा दी। फिल्म में कुछ देर बाद लड़कियों ने
लड़कों के लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिए।
मैं बोली- भाभी यह काम तो केवल रंडियां ही कर सकती हैं !
भाभी मुस्करा कर बोली- शुरू शुरू में तो गन्दा लगता है लेकिन एक बार चूस लो तो फिर
बार बार लंड चूसने का मन करता है ! तेरे भैया तो दिन में एक बार लंड चुसवाते ही
हैं।
मैं बोली- ऊहं ! मैं तो कभी नहीं चूस सकती !
कुछ देर बाद लड़की की चूत में लौड़ा घुसा कर लड़के चोदने लगे। कमरे में फिल्म की
सेक्सी आवाज़ गूँज रही थी। भाभी पेटीकोट उठा कर अपनी चूत सहलाने लगीं। मेरा हाथ बार
बार मेरी चूत पर जा रहा था लेकिन मैं हटा लेती थी।
भाभी मुस्करा कर मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- शरमा क्यों रही है ? खुजली हो रही है तो
खुजा ले ! ला, मैं तेरी खुजा देती हूँ और तू मेरी खुजा दे !
भाभी ने मेरी मैक्सी खोल कर मेरी चड्डी में ऊँगली डाल दी और मेरी चूत खुजानी शुरू
कर दी। मेरा हाथ उन्होंने अपनी चूत पर रख दिया। मैं भी उनकी चूत खुजलाने लगी। ब्लू
फिल्म अपनी चरम सीमा पर थी। अब दो लड़कियों की चूत उन्हें सीधा लेटाकर २ लड़के मार
रहे थे और एक लड़का उनमें से एक लड़की को अपना लंड चुसवा रहा था। उनकी उहं उहं ओह ओह
की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
मैं और भाभी बहुत गरम हो रहे थे, भाभी ने अपना पेटीकोट, ब्लाउज़ उतार दिया था। मैं
भी सेक्स की गर्मी में नहा रही थी और पूरी नंगी हो गई थी। भाभी की चूत पूरी चिकनी
थी। मेरी चूत पर झांटों का जंगल उग रहा था।
भाभी बोली- ननदजी, लगता है रमेश जी को जंगल में घुस कर चोदना अच्छा लगता है !
उन्होंने मेरी चूत में ऊँगली घुसा दी। मैंने भी उनके चूत के होटों को रगड़ना जारी
रखा।
फिल्म ख़त्म हो गई थी। हम दोनों पूरी नंगी एक दूसरे से बुरी तरह से चिपकी हुई थी।
मेरी चूत भाभी की चूत से पूरी छुल रही थी और चूचियां रगड़ खा रही थीं। हम दोनों ने
एक दूसरे के होंठ चूसे और चूचुक उमेठे। थोड़ी देर बाद भाभी और मैंने एक साथ पानी छोड़
दिया उसके बाद हम दोनों सो गए।
अगली रात को हम लोग फिर साथ सोये। आज भाभी मेरे सामने पूरी नंगी हो गई थीं, बोली-
तेरे भैया के साथ तो मैं पूरी नंगी ही सोती हूँ ! अब कल तो हम लोगों ने मौज की ही
थी, आज और मौज करते हैं!
और उन्होंने मुझे भी पूरा नंगा करा दिया। मेरी झांटों के जंगल पर हाथ फिरा कर भाभी
बोलीं- चल, इसे साफ कर ले ! फिर मज़ा चखाती हूँ !
और उन्होंने क्रीम लगाकर मेरी चूत पूरी चिकनी कर दी। भाभी बोलीं- आज मैं तुझे असली
लंड जैसा मजा देती हूँ !
भाभी अपनी अलमारी की तरफ गईं, उन्होंने एक नकली लंड अपनी अलमारी से निकाला और बोली-
यह नकली लंड है ! बिल्कुल असली जैसा मज़ा देता है ! तेरे भैया ने अमेरिका से लाकर
दिया है। इसे चूत में फिट करके लड़कों की तरह औरतों को चोदा जा सकता है और अपने हाथ
से भी चूत में डाल कर मजा ले सकते हैं। अब बता मैं तुझे चोदूँ या तू मुझे चोदेगी?
मैं बुरी तरह शरमा रही थी, भाभी बोली- बहुत शर्माती है? चल लेट ! पहले मैं ही तुझे
चोदती हूँ !
और उन्होंने अपनी चूत में लंड फिक्स कर लिया। भाभी नकली लंड लगा कर ऐसी लग रहीं थीं
जैसे कोई गोरे लंड वाला चिकना लौंडा मुझे चोदने को खड़ा है। मुझे गिरा कर भाभी मेरे
ऊपर लेट गईं और मेरी चूत में अपना नकली लौड़ा हाथ से पकड़ कर घुसा दिया। नकली लंड
मेरे पति से मोटा था, मेरे मुँह से ऊहऽऽ मर गई ! मर गई ! की आवाज़ निकल गई, लेकिन
मुझे साथ ही साथ मज़ा भी आया था।
भाभी ने मेरी चूचियाँ मलते हुए करीब दस मिनट तक नकली लंड से मुझे चोदा। उसके बाद
उन्होंने मेरी चूत में लंड फिक्स कर दिया और बोली- चल अब तू मुझे चोद !
मैं चोदने में शरमा रही थी, भाभी बोली- साली शरमाती बहुत है !
और वो मेरे ऊपर उछ्ल कर बैठ गईं और ऊपर उछ्ल उछ्ल कर चुदने लगीं। उन्होंने मेरे हाथ
अपने बड़े बड़े संतरों पर रख लिए और बोलीं- कुतिया, इन्हें तो दबा दे !
मुझे उनके मोटे मोटे चूचे मसलने में बड़ा मज़ा आने लगा। थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गई।
उसके बाद हम दोनों पहले की तरह चिपक कर सो गई।
रात के 3-4 बजे घर में घंटी बजी, भैया बाहर से आ गए थे। मैं भी जाग गई। भाभी, मैं
और भैया बातें करने लगे। थोड़ी देर में मैं सोने लगी। तभी मुझे ऐसा लगा जैसे भाभी
उठकर बाथरूम में गई हों। कुछ देर बाद मैंने बाथरूम में झाँककर देखा तो मैं दंग रह
गई- भाभी भैया का लंड पैंट से निकाल कर लपालप चूसे जा रही थीं। उसके बाद इंग्लिश
टॉयलेट पर बैठकर भैया ने अपने लौड़े पर भाभी को बिठा लिया और कस कस कर उनकी चूचियों
को मसलने लगे। भाभी धीरे धीरे चिल्ला रही थी- कुत्ते ! चूत में डाल इस लौड़े को ! 15
दिन से बिना चुदे पड़ी हूँ ! कोई और होती तो रंडी बन गई होती ! भैया ने एक झटके में
लंड भाभी की चूत में घुसा दिया और भाभी चिल्ला उठीं- उईऽऽ ! मर गई ! फट गई ! मज़ा आ
गया ! क्या घुसाया है !
भैया भाभी की घुन्डियाँ मसलते हुए बोले- रंडी, नकली लंड नहीं डाला अपनी चूत में ?
तुझे अमेरिका से लाकर दिया था !
लौड़े पर उछ्लती हुई भाभी बोली- अरे कुत्ते ! तेरे जैसे लंड का मज़ा नकली में कहाँ !
साले को जब तक नहीं चखा था तब तक तो कोई बात नहीं लेकिन अब तो तीन दिन नहीं चुदुं
तो मन करने लगता है कि सब्जी वाले को बुलाकर चुदवा लूँ ! मेरे कुत्ते, ज्यादा दिन
को मत जाया कर ! अगर रंडी बन गई तो तू जिम्मेदार होगा..
भाभी उनके लौड़े पर धीरे धीरे उछ्ल रहीं थीं, भैया उनकी चूचियों की घुन्डियाँ मसल
रहे थे। भैया बोले- चल जरा हट थोड़ा ! तेरे को पीछे से ठोकता हूँ !
भैया ने भाभी को उठा दिया। भैया उठते, इससे पहले ही भाभी ने उन्हें रोका और बोलीं-
तेरा शेर बहुत सुंदर लग रहा है ! इसको थोड़ा चूस लूं !
यह कह कर उन्होंने भैया का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और तेजी से आगे पीछे करके
चूसने लगी। मैं हैरान थी कि मेरी भाभी इतना मस्त होकर लौड़ा चूसती हैं। भाभी इस समय
ब्लू फिल्म की हिरोइन लग रही थीं। भैया का सुपाड़ा ऐसे चाट रही थीं जैसे कोई
आइसक्रीम चाट रहा हो। भैया भाभी की गांड में ऊँगली कर रहे थे।
भैया बोले- चल कुतिया लौड़ा छोड़ और अब जरा चूत बजाने दे।
भाभी टॉयलेट की सीट पर हाथ रखकर घोड़ी बन गईं। भैया ने पीछे से उनकी चूत में लंड
छुला दिया और धीरे धीरे से उनके संतरे मसलते हुऐ लंड उनकी चूत में घुसा दिया और
भाभी को चोदने लगे। भाभी की ऊहं ऊह की आवाजें साफ़ सुनाई दे रही थीं। भैया बीच बीच
में जोर से हाथ उनके चूतड़ों पर मार देते थे। कुछ देर बाद भैया ने अपना लंड बाहर
निकाल लिया। लंड झड़ चुका था। भाभी खड़ी होकर भैया से चिपक गईं और उन्हें चूमती हुई
बोलीं- सच, आज बहुत मजा आया !
इसके बाद मैं बिस्तर पर आकर लेट गई थोड़ी देर में भाभी भी मेरे पास आकर सो गईं। मैं
सोच रही थी कि भाभी तो बहुत बदमाश हैं, लंड लपालप ऐसे चूसती हैं जैसे आइसक्रीम खा
रही हों ! छीः छीः कितना गन्दा काम है लंड चूसना ! चुदने में तो मजा आता है लेकिन
लंड चूसना ? छीः छीः. मैं तो कभी नहीं चूस सकती..
अगले दिन से मैं अलग कमरे में सोने लगी। भाभी अब भैया के साथ सो रही थीं। मुझे घर
में रहते हुए बीस दिन से ज्यादा हो गए थे। भाभी अब मुझसे थोड़ा चिढ़ने लगी थीं।
एक दिन मैं बाज़ार घूमने गई। मुझे बाज़ार में मेरी पुरानी सहेली उमा मिल गई, वो मुझसे
बोली कि उसके पति बाहर गए हुए हैं और मुझे अपने साथ रहने को कहा।
उमा मेरी अच्छी दोस्त थी। मेरी दोस्त होने के कारण उसकी भाभी से भी दोस्ती थी लेकिन
वो बदमाश टाइप लड़की थी और पैसे के लिए बहुत लालची थी, शादी से पहले वो मेरे साथ
हॉस्टल में रहती थी तो उसकी एक कॉल गर्ल के दलाल से दोस्ती थी और महीने में एक दो
बार उमा पंच-तारा होटल में चुदने जाती थी। मुझे वो बताती थी कि उसके एक रात के दस
हज़ार लगते हैं जिसमें से पाँच उसको मिल जाते थे और ग्राहक टिप अलग से देता था। मुझे
भी उसने चुदने के लिए कई बार कहा, लेकिन मैं कभी चुदने नहीं गई। बाद में उमा की
शादी एक कम्पनी के मैंनेजर से हो गई।
मुझे घर में रहते हुए 20-22 दिन हो गए थे, भाभी मुझसे चिढ़ने सी लगी थीं। मैंने सोचा
की दो दिन बाद मैं उमा के पास जाकर रह लूंगी। मेरी मौसी दो दिन के लिए आ रही थीं।
मैंने उमा से कहा- मैं दो दिन बाद तेरे साथ आकर रहूंगी।
अगले दिन मेरी मौसी आ गईं पूरा दिन गपशप में चला गया। रात में मुझे भाभी के कमरे
में सोना पड़ा। मैं भाभी के कमरे में भाभी के साथ सोई। आदमी लोग अलग कमरे में सोये।
मौसी और माँ एक अलग कमरे में सोई थीं। अगले दिन भैया को सुबह टूर पर जाना था, भाभी
भन्ना सी रही थीं क्योंकि आज उन्हें बिना चुदे सोना था। मुझसे एक दो बार बोली भी
थीं कि तू बिना चुदे कैसे रह लेती है? मेरी तो चूत एक दिन न चुदे तो खुजियाने लगती
है। रात बारह बजे भाभी मुझसे बोली- प्यारी ननद जी, आप एक घंटा छत पर टहल आओ, तब तक
मैं इनसे से चुदवा लेती हूँ ! फिर तो यह 5 दिन बाद वापस आयेंगे।
मुझे पहले से ही नींद नहीं आ रही थी, मैं बाहर छत पर टहलने चली गई। मौका देखकर भाभी
ने भैया को अंदर बुला लिया और अपनी चूत की सेवा करवाने लगीं।
थोड़ी देर बाद मैंने सीढ़ियों के पास मौसी और मौसा को कुछ फुसफुसाते देखा। मैं चुप हो
कर बातें सुनने लगी। मौसी मौसा का लंड पैंट से निकाल कर पकड़े हुए थीं और कह रही थीं-
कुत्ते, तेरा घोड़ा तो बड़ा टनटना रहा है लेकिन चूत में घुसते ही पिचक जाता है। एक
जमाना था कि एक एक घंटे तक मेरी सुरंग में हल्ला मचाता रहता था।
मौसी की दोनों चूचियां खुली हुई थीं और पपीते की तरह लटक रही थीं। मौसा मौसी की
चूचियां मसल रहे थे, मौसी के चूचुक पर चुटकी काटते हुऐ मौसा बोले- कुतिया, बहुत
गाली दे रही है ? तेरी जवानी की आग भी तो बहुत बुझाई है इसने !
मौसी लंड को मसलते हुए बोलीं- अरे गाली क्यों दूँगी मेरे कुत्ते ! तेरे शेर को तो
मैं अब भी सबसे जयादा प्यार करती हूँ ! इधर ला जरा एक पप्पी तो लेने दे इसकी !
इतना कह कर मौसी ने मौसा का लौड़ा मुँह में रख लिया और पूरी मस्त होकर चूसने लगी।
मैं हैरान थी कि पचास साल की मौसी भी लौड़ा चूस सकती हैं। मौसी मौसा की गोदी में सर
रखकर मस्ती से 5 मिनट तक लौड़ा चूसती रहीं, 55 साल के मौसा ने 5 मिनट बाद रस छोड़
दिया, मौसी उसे अपने मुँह में गटक गई।
मौसा बोले- चल भाग चलें ! किसी बच्चे ने देख लिया तो क्या सोचेगा !
मैं 2-3 मिनट खड़ी यह सोचती रही कि पता नहीं लोग लौड़ा कैसे चूस लेते हैं ?
अगले दिन मौसी ने मुझे अकेले में पकड़ लिया और बोली- क्यों? रात को छिप कर क्या देख
रही थी? इतनी चूत में आग लग रही है तो आदमी से दूर क्यों रह रही है? घर जा और चुदवा
! यह गन्दी बात होती है किसी को छिप कर देखना !
भाभी मुझसे चिढ़ी-चिढ़ी सी रह ही रही थीं, ऊपर से मौसी की बात से मेरा दिमाग ख़राब सा
हो रहा था। इन सबके बाद एक असली बात यह भी थी कि मेरी चूत में खुजली भी जोरों की हो
रही थी क्योंकि मेरे पति चूत तो मेरी रोज़ ही चोदा करते थे और अब भाभी मौसी की
चुदाई होते देखकर मेरी चूत रोज़ पानी छोड़ रही थी। मैंने सोचा कुछ दिन उमा के पास
जाकर रह आती हूँ।
उमा एक मस्त स्वभाव की लड़की थी कॉलेज के दिनों में उसने काल गर्ल बनकर, बॉय फ्रेंड
बनाकर कई बार कई लोगों से अपनी चूत को चुदवाया था। मेरी रूम मेट रही थी, कई बार
गर्मी में हम दोनों नंगी होकर सोती थीं इसलिए मुझमें और उसमे शर्म की कोई बात नहीं
थी। मेरी उससे अच्छी दोस्ती थी। रात को नौ बजे मैं उमा के घर पहुँच गई। मुझे देखकर
उमा खुश हो गई। हम दोनों ने खाना खाया, इसके बाद उमा मेरी साड़ी उतार कर बोली- चल,
आज नंगे सोते हैं ! तेरी सुहागरात और चुदाई की कहानी भी तो मुझे सुननी है !
चूंकि पहले भी हम नंगी होकर सो चुकी थीं इसलिए रात को हम दोनों नंगी होकर सो गईं।
उमा बोली- अब तो तेरी शर्म छुट गई होगी ! तीन महीने हो गए तेरी शादी को ! अब तक तो
सौ से ज्यादा बार चुद चुकी होगी? बोल, चुदने में मज़ा आता है या नहीं?
और वो मेरा चूत के होटों से खेलने लगी। मैंने कभी खुल कर अतुल से चूत नहीं चुदवाई
थी लेकिन रोज़ रात को अतुल जबरदस्ती मेरी चूत चोद देते थे। अब 20-25 दिन से मैं
बाहर थी तो मुझे चूत की खुजली पता चल रही थी। मैं भी उमा की चूत खुजाने लगी। थोड़ी
देर में हम दोनों गर्म थीं, उमा बोली- खुजली ज्यादा हो रही हो तो बोल ! धंधे पर
चलते हैं ! नोट भी कमाएंगे और मौज भी लेंगे !
मैं बोली- नहीं बाबा ! नहीं ! मुझे तो बड़ा डर लगता है ! तू क्या शादी के बाद भी
धंधा करती है?
उमा बोली- भाई कभी कभी अब भी लगवा लेती हूँ ! पटी जब बाहर होते हैं ! एक रात के
पाँच हज़ार मिल जाते हैं और मज़ा भी आ जाता है। लेकिन सिर्फ अपने पुराने यारों से
लगवाती हूँ नहीं तो बदनाम हो जाऊंगी। मैं तो साली बदनाम हो गई थी इसलिए तो 5000
रुपए कमाने वाले से शादी हुई नहीं तो तेरी तरह सॉफ्टवेयर इंजिनियर से शादी होती !
चल यह छोड़, यह बता कितना मोटा लंड है तेरे पति का? अभी नई नई शादी हुई है, 3-4 बार
तो चूस ही लेती होगी एक दिन में ?
मैं हूँ हाँ करती रही ! मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सब लौड़ा चूसने की बातें
क्यों करती हैं !
12 बजे के करीब मैं सो गई। रात को 3 बजे के करीब उमा का मोबाइल बजा। उमा ने तुंरत
काट दिया। मैं नींद में थी इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन दस मिनट बाद उमा उठ
कर गाउन पहन कर गई तो मैं चौंक गई। दबे पाँव मैंने पीछे जाकर देखा तो मैं हैरान थी।
उमा ने अपने फ्लैट का दरवाज़ा खोला, एक जवान सा लड़का अंदर आया, उमा उसे दूसरे कमरे
में ले गई और बोली- राजीव जी, पहले फीस निकालिए !
राजीव ने सौ के नोटों की गद्दी उमा के हाथ में रख दी। उमा मुस्करा दी, गद्दी अलमारी
में रख दी और राजीव की पैंट की चैन खोल दी। उसके बाद उसका लौड़ा निकाल कर चूसने
लगी। राजीव ने अपनी पैंट उतार दी। राजीव का लौड़ा सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा
होगा। पूरा लौड़ा लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था और उमा लौड़ा लप लप कर के चूस रही
थी।
मैं छुप कर देखने लगी। कुछ देर में दोनों नंगे थे। राजीव उमा को पलंग पर लिटा कर
उसकी चूत चूसे जा रहा था, उमा की आह ऊह ओह की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। मेरी
चूत में जोरों की खुजली हो रही थी। होती भी क्यों नहीं ! आज मुझे चुदे हुए पूरा एक
महीना हो गया था।
उमा थोड़ी देर बाद चूत फ़ैला कर लेट गई। राजीव ने उसकी चूत में अपना सात इंच लम्बा
लंड ठोंक दिया और धक्के मरना शुरू कर दिया। उमा की चुदाई शुरू हो गई थी। उमा जोर
जोर से चिल्ला रही थी- उई ! बड़ा मजा आ रहा है ! और जोर से पेल कुत्ते ! क्या चोदता
है ! क्या मस्त लंड है ! महीने में एक बार तो आ जाया कर ! अगली बार से 10% छूट
दूँगी साले ! हरामी क्या मस्त बजाता है ! और जोर से पेल कुत्ते !
राजीव ने 15 मिनट तक उमा की चूत बजाई। उसके बाद उसका लंड खाली हो गया और उसने लंड
बाहर खींच लिया। उमा की चूत की प्यास शांत नहीं हुई थी, उसने राजीव को जबरदस्ती
अपनी तरफ खींच कर एक बार दुबारा उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी। मैं
तो हैरान थी कि भाभी, मौसी उमा सब लंड चूसने में होशियार हैं और मैं लण्ड चूसने को
लेकर लड़ कर आ गई। मेरे मन में एक बार लण्ड चूसने का ख्याल आया लेकिन अपने अहं के
कारण मैं लंड नहीं चूसना चाहती थी और अतुल के पास वापस नहीं जाना चाहती थी।
मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ देर
और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।
सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे उमा
बोली- चुदना हो तो बता दियो ! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है !
मैंने अनजान बन कर पूछा- उमा, शादी के बाद भी औरों से चुदवाती है क्या ?
मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ देर
और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।
सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे उमा
बोली- चुदना हो तो बता दियो ! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है !
मैंने अनजान बन कर पूछा- उमा, शादी के बाद भी औरों से चुदवाती है क्या ?
उमा मुस्करा कर बोली- कुतिया, जो एक से ज्यादा लंडों का मज़ा ले ले, वो फिर लंड की
भूखी हो जाती है ! मेरी जान नए नए लंडों से चुदने में जो मज़ा आता है वो एक मर्द के
लंड में कहाँ है ! मुझे गांड मरवाने में भी मज़ा आता है लेकिन मेरे पति गांड कभी
नहीं मारते ! अपने यारों से मरवानी पड़ती है, ऊपर से कमाई और हो जाती है। चुदना कम
कर दिया है लेकिन महीने में दो तीन का डलवा ही लेती हूँ, जब यह टूर पर होते हैं तो
एक महीने में 10-10 12-12 से भी चुदवा लेती हूँ।
उमा बोली- तू सो रही थी तो एक कुत्ते से तो कल ही चुदवाया है ! परसों खुजली ज्यादा
हो रही थी और किसी से सेटिंग नहीं हो पाई तो दूध वाले को बुलाकर लाई और उससे
चुदवाया था ! असली मज़ा तो चूत के अंदर है ! मेरी रानी चुदवाओ और मस्ती करो ! यही
जिन्दगी है ! जिसने लंड का मज़ा लेना सीख लिया उसे किसी और मज़े में मज़ा नहीं आता है
!
मैं धीरे से बोली- अगर किसी को पता चल गया तो ?
मेरी चूची दबाते हुए उमा बोली- एक गुप्त बात बताऊँ ! तेरी भाभी को 10-12 बार चुदवा
चुकी हूँ। दो साल पहले पहली बार चुदवाया था। अब तो महीने में कम से कम एक बार तो
तेरी भाभी भी बाहर के लंड से चुदती हैं और उनकी चूत के लिए लंड की जुगाड़ तो मैं ही
करती हूँ। तू भी एक बार चुदवा तो ! किसी को पता भी नहीं चलेगा और मज़ा भी बहुत आएगा
! और जिन जिन औरतों को मैंने चुदवाया है, उनके पति भी बहुत खुश रहते हैं क्योंकि वो
जान जाती हैं कि चुदवाया कैसे जाता है।
मेरे मुँह से निकल गया- ठीक है ! लेकिन किसी को पता नहीं चले !
उमा बोली- यह मेरा वादा है ! चल फिर तैयार हो जा ! आज रात के लिए तुझे काल गर्ल
बनाती हूँ ! मैं और तू दोनों साथ धंधा करेंगे !
उमा ने 3-4 जगह फ़ोन मिलाये और फिर मुस्कराती हुई बोली- दो कुत्ते आ रहें हैं ! एक
तो बड़ी राजनैतिक पार्टी का युवा अध्यक्ष है, दूसरा शहर का एक बड़ा ठेकेदार है !
ठेकेदार से मैं और तेरी भाभी दोनों दो-दो बार चुद चुकी हैं ! साले का आठ इंच लम्बा
लंड है। आज तुझे चुसवाती हूँ !
मैं झेंपते हुए बोली- नहीं, लंड नहीं चूसूंगी ! बस चूत में डलवा लूंगी !
उमा मेरी घुंडियों पर चुटकी काटते हुए बोली- वो तू उन पर छोड़ दे
!
मैं कुछ रोमांचित महसूस कर रही थी, रात की चुदाई के बारे में और सोच सोच कर और मेरी
चूत गीली होने लगी थी।
शाम के छः बजे उमा ने ब्लू फिल्म चला दी। नई-नई गोरी-गोरी दो भारतीय लड़कियों की
चूत फिल्म में तीन अंग्रेज़ चोद रहे थे। सब के लंड 8-9 इंच से कम नहीं थे। चुदने के
मस्त मस्त सीन थे, उमा बीयर का ग्लास ले आई और बोली- इसे पी, पीने के बाद चुदवाने
में बहुत मज़ा आएगा।
थोड़ी न नुकर के बाद एक ग्लास बीयर का मैंने पी लिया। अब मैं पूरी गर्म हो रही थी,
मेरी चूत खुजिया रही थी चुदवाने के लिए। उमा मुझे ग्राहकों से बात करने के तरीके
बताने लगी। आठ बजे करीब हम दोनों ने पारदर्शी मैक्सी पहन ली। मेरे दोनों संतरे
मैक्सी में से बिलकुल साफ़ दिख रहे थे। बीयर में कामोत्तेजक दवाई मिली हुई थी, इसलिए
मेरी चूत की खुजली काफी बढ़ी हुई थी और मैं चुदने के लिए पगला रही थी।
नौ बजे दरवाज़े की घंटी बजी। राजू और अनिल नाम के दो आदमी जिनकी उम्र पैन्तीस साल के
करीब थी, अंदर आये। उन्होंने अंदर घुसते ही हमारी कमर में हाथ डाल दिया। राजू मेरी
कमर में हाथ डाले हुए था, जिसे थोड़ी देर बाद उसने पीछे से मेरी चूचियों पर रख दिया
और उन्हें दबाने लगा। अनिल उमा को पहले भी दो बार चोद चुका था। उमा की तरफ देखते
हुए बोला- उमा जी, मज़ा आ गया ! क्या खूबसूरत हसीना है तेरी फ्रेंड !
और उसने मेरी चूचियाँ आगे से कस कस कर मसल दीं और बोला- कुतिया, जरा अपना नाम तो
बता दे !
मैं मुस्कराते हुए बोली- आपको जो पसंद हो वो बुला लेना !
राजू बोला- हमें तो तू मालगाड़ी लग रही है ! चल तेरा नाम मालगाड़ी रख देते हैं।
उमा बोली- राजा मालगाड़ी के बदले माल तो निकाल !
अनिल ने एक 500 की गद्दी उमा की तरफ बढ़ा दी और बोला- ले मेरी कुतिया आज तू जितना
सोची होगी उससे ज्यादा लाया हूँ।
नोट की गद्दी उमा ने अलमारी में रख दी और बोली- हजूर ! अब हम लौंडियाऐं तुम्हारी
गुलाम हैं।
हम दोनों को राजू और अनिल ने गोद में उठा लिया और पीछे वाले कमरे में ले आए। राजू
ने अपने होंठ मेरे होटों से चिपका दिए और मेरे होटों का रस चूसने लगा। साथ ही साथ
मेरे संतरों का जूस भी निकल रहा था। उमा को अनिल ने पूरा नंगा कर दिया था और उसके
ऊपर लेटकर उसके होंठ चूसे जा रहा था। उमा उसका लंड पकड़े हुए थी। थोड़ी देर में उमा
ने अनिल को हटा दिया और दो पैग बनाने लगी। मेरी मैक्सी भी जो अब नाममात्र की शरीर
पर रह गई थी, राजू ने उसे भी हटा दिया। अनिल और राजू ने भी अपने कपड़े उतार दिए थे।
जब तक उमा पेग बना रही थी तब तक दोनों साइड में मुझसे चिपक कर मेरे संतरों से खेल
रहे थे और अपनी जांघें मेरी जांघों से सटा कर रगड़ रहे थे। मेरी चूत गरम भट्टी की
तरह दहक रही थी। उमा थोड़ी देर बाद चार पेग बना लाई। हम लोगों ने चीयर्स करी और फिर
हम दोनों को राजू और अनिल ने पलंग पर आधे लेटे हुए अपनी गोद में लौड़े के ऊपर बैठा
लिया। दोनों के लंड मेरी और उमा की चूत से टकरा रहे थे और दोनों हमारे मुँह तिरछा
कर के होंठ चूस रहे थे और चूचियाँ मसल रहे थे।
अनिल बोला- उमा डार्लिंग ! जरा लौड़ा चूसो ! साला तुम्हारे प्यार के लिए तड़प रहा है
!
राजू भी मुझसे लौड़ा चुसवाने के लिए बोला लेकिन मेरा लौड़ा चूसने का मन नहीं कर रहा
था।
उमा बोली- पहली बार गैर आदमी से चुद रही है, इसलिए शरमा रही है !
उमा ने मेरे चूचुकों पर चुटकी काटी और बोली- जरा लौड़ा पकड़ के तो देख ! कितना मस्त
लौड़ा है ! बिलकुल लोहे की रॉड की तरह है ! बहुत मस्त चोदते हैं राजू साहब !
और उमा ने मेरा हाथ उठाकर उसके लंड पर रख दिया किसी तरह चोर नज़रों से मैंने राजू
का लौड़ा मुट्ठी में पकड़ लिया। लौड़ा बिल्कुल कठोर और गर्म हो रहा था। मेरे को नशा हो
रहा था और मेरी चूत बुरी तरह गर्म हो रही थी इसलिए मैं लौड़ा मसलने लगी और राजू से
चिपक गई। उमा का भी यही हाल था। मेरी चूत पूरी गीली हो रही थी और पानी छोड़ रही थी।
थोड़ी देर बाद अनिल और राजू एक साथ उठे और बोले- रानी चलो एक एक राउंड तुम्हारी
चुदाई का हो जाए !
मेरा गोरा गरम बदन और ऊपर से पहली बार दारू के नशे ने मेरी सेक्स मस्ती को बढ़ा दिया
था। राजू का लौड़ा मैं जोर जोर से सहला रही थी, तभी राजू ने मुझे नीचे लेटा दिया और
मेरे संतरे अपने हाथों से मसलते हुए मेरे ऊपर सवार हो गया। उसने मेरी चूत पर एक जोर
का झटका लौड़े से मारा। मेरे मुँह से- ऊई ! मज़ा आ गया ! घुसा साले ! अंदर घुसा ! की
आवाज़ निकल गई। राजू नशे में था, अपने लौड़े को सही जगह फिट नहीं कर पा रहा था।
दूसरी तरफ उमा की चूत में अनिल ने लौड़ा घुसा दिया था। बिल्कुल ब्लू फिल्म की तरह
उमा चुद रही थी।

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